गुरुवार, 25 जून 2026

नर्मदा मैया का शास्त्रोक्त स्वरूप

*नर्मदा मैया का शास्त्रोक्त स्वरूप* 

*हर हर नर्मदे* 🙏



शास्त्रों में माँ नर्मदा को साक्षात शिव-पुत्री और आनंद-दायिनी कहा गया है। स्कंद पुराण के रेवाखंड में इनके दिव्य स्वरूप का वर्णन मिलता है।

*माँ का शास्त्रीय स्वरूप:*

*नीलवर्णा:* माँ का वर्ण जल के समान श्याम-नील है, जो अनंत गहराई और शांति का प्रतीक है।

*चतुर्भुजा:* चार भुजाओं में माँ धारण करती हैं -
- *अभय मुद्रा:* 
भक्तों के भय हरने के लिए। हथेली पर अंकित ॐ भक्तों को निर्भय करता है।
- *शिवलिंग:* 
गोद में शिवलिंग लिए माँ बताती हैं कि वो स्वयं शिव-स्वरूपा हैं। नर्मदा का हर कंकर शंकर है।
- *कमल पुष्प:* 
पवित्रता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक।
- *कलश:* 
अमृत, जीवन और समृद्धि से भरा कलश, जिससे माँ सृष्टि का पालन करती हैं।

*वाहन मकर:* 
माँ का वाहन मगरमच्छ है। मकर जल का राजा है, जो दर्शाता है कि माँ समस्त जल-तत्व की अधिष्ठात्री देवी हैं।

*कमल आसन:* जल के बीच खिले कमल पर विराजमान माँ सिखाती हैं कि कीचड़ में रहकर भी पवित्र कैसे रहा जाता है।

*शास्त्र कहते हैं:* 
_"नर्मदा सरितां श्रेष्ठा रुद्रतेजात् विनि:सृता"_  
अर्थात नदियों में श्रेष्ठ नर्मदा, भगवान रुद्र के तेज से प्रकट हुई हैं। इनके दर्शन मात्र से ही समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। गंगा स्नान से, यमुना पान से, पर नर्मदा दर्शन मात्र से मोक्ष देती हैं।

*माँ नर्मदा हम सबकी रक्षा करें।*  
*नर्मदे हर, जिंदगी भर*


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