सूर्यदेव
#सूर्यदेव साधना।। रवि सप्तमी 8/2/2026 पर अवश्य करें
सुख सौभाग्य की वृद्धि के लिए, दुःख दारिद्र्य को दूर करने के लिए, रोग व दोष के शमन के लिए इस प्रभावकारी मंत्र की साधना रविवार के दिन करनी चाहिए।
ॐ सूर्यदेवं नमस्तेस्तु गृहाणं करूणा करं।
अर्घ्यं च फलं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम्।।
ॐ सर्वतीर्थं समूदभूतं पाद्य गन्धदिभिर्युतम्।
प्रचंण्ड ज्योति गृहाणेदं दिवाकर भक्त वत्सलां।।
दिव्यं गन्धाढ़्य सुमनोहरम् ।
बिलेपनं रश्मिदाता चन्दनं प्रतिगृह यन्ताम्।
इस साधना में रविवार का व्रत अनिवार्य है। व्रत के दिन नमक का उपयोग न करें। रविवार के दिन खुले आकाश के नीचे पूर्व की ओर मुँह करके शुद्ध ऊन के आसन या कुशासन पर बैठकर काले तिल, जौ, गूगल, कपूर और घी मिला हुआ शाकल्य तैयार करके आम की लकड़ियों से अग्नि को प्रदीप्त कर उक्त मंत्र से एक 108आहुतियाँ दें।
मंत्र:-ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः श्रीम्।
Om hreem ghrani sury aditya shreem.
सुख सौभाग्य की वृद्धि के लिए, दुःख दारिद्र्य को दूर करने के लिए, रोग व दोष के शमन के लिए इस प्रभावकारी मंत्र की साधना रविवार के दिन करनी चाहिए।
तत्पश्चात सिद्धासन लगाकर इसी मंत्र का सौ बार जप करें। जप करते समय दोनों भौंहों के मध्य भाग में भगवान सूर्य का ध्यान करते रहें। इस तरह 11 दिन तक करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। इस साधना में रविवार का व्रत अनिवार्य है।
व्रत के दिन नमक का उपयोग न करें। इसके बाद प्रतिदिन स्नान के बाद ताम्र-पात्र में जल भरकर इसी मंत्र से सूर्य को अर्घ्य दें। जमीन पर जल न गिरे इसलिए नीचे दूसरा ताम्रपात्र रखें। तत्पश्चात इस मंत्र का एक 108बार जप करें।
भगवान सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा गया है। जो मनुष्य सूर्य को12 नाम लेते हुए जल अर्पण करते हैं पाप मुक्त होते हुए आरोग्य प्राप्त करते हैं।
।।सूर्य अष्टकम।।
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ॥१॥
सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।
श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥२॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥३ ॥
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥४ ॥
बृंहितं तेजसां पुञ्जं वायुमाकाशमेव च ।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥५॥
बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥६ ॥
तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजःप्रदीपनम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥७ ॥
तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥८॥
मात्र इतना स्तोत्र, मंत्र जप करने से आयुष्य, आरोग्य, ऐश्वर्य और कीर्ति की उत्तरोत्तर वृद्धि होती है।

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